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मुहावरे एवं कहावतें/लोकोक्तियाँ | Muhavare in Hindi

Muhavare in Hindi : मुहावरे को अँगरेजी में ‘Phrase’ कहा जाता है यह एक प्रकार का ऐसा वाक्यांश होता है, जिसके प्रयोग से भाषा में जान आ जाती है कहावत या लोकोक्ति ‘Proverb’ कहलाती है यह अपने आप में एक प्रकार का वाक्य होता है, जिसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किसी उचित समय, घटना या अवसर पर किया जाता है इसके सटीक प्रयोग से व्यक्ति का भाषा ज्ञान परिलक्षित होता है।

हाँ, मुहावरों के संबंध में कुछ बातें हैं, जिन्हें समझना जरूरी है प्रायः अधिकतर मुहावरों के एक नहीं अनेक अर्थ होते हैं जैसे—“मुँह चलना।” इसका अर्थ होता है (1) भोजन होना या खाया जाना (2) खूब बोलना (3) मुँह से व्यर्थ की बातें या दुर्वचन निकलना।

Muhavare in Hindi

आप जो भी अर्थ जानते हों, उसका वाक्य में ठीक-ठीक प्रयोग करें, जिससे उसका कोई अर्थ स्पष्ट हो जाए यहाँ इस लेख में यहाँ आपको एक से बढ़कर एक कहावते,मुहावरे वाक्य के उदाहरण के साथ उपलब्ध कराएँ है।

मुहावरे, कहावतें, लोकोक्तियाँ – Muhavare in Hindi

  1. अंग तोड़ना (पूर्णतः शिथिल कर देना, अंगड़ाई लेना) इस कठिन चढ़ाई ने मेरे अंगों को तोड़ दिया है। 
  2. अंग मरोड़ना (अँगड़ाई लेना) आज तो तुम अपने अंग बहुत मरोड़ रहे हो, क्या बात है ?
  3. अंग मोड़ना (शरीर के भागों को सिकोड़ना/लज्जा से देह छिपाना) शिष्ट औरतें लोगों के सामने अपने अंगों को मोड़कर रखती है। 
  4. अंग लगना (गले लगना, भोजन द्वारा शरीर का पुष्ट होना) — डाक्टर साहब, पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी आजकल मेरे अंग नहीं लगते है।
  5. अंग लगाना (गले या छाती से लगाना, आलिंगन करना) खोए पुत्र के मिलते ही माँ ने उसे अंग लगा लिया। 
  6. अंगार या अंगारा बनना (खा-पीकर लाल होना/क्रोधित होना) अपने दुश्मन को देखते ही सोहन अंगार बन जाता है।
  7. अंगारों पर पैर रखना (जानबूझ कर हानिकारक कार्य करना) — इस काम को करने का मतलब ही है अंगारों पर पैर रखना। 
  8. अंगारों पर लोटना (अत्यंत रोष प्रकट करना) दुश्मन की तरक्की देखकर वह अंगारों पर लोटने लगता है।
  9. अँगूठा चूमना (खुशामद करना, अधीन होना) लाख अँगूठे चूमो, लेकिन वह तुम्हारा काम नहीं करेगा।
  10. अँगूठा दिखाना (अस्वीकार करना, अवज्ञा करना) — जरूरत पड़ने पर उसने मुझे अँगूठा दिखा दिया।
  11. अँगूठे पर मारना (तुच्छ समझना / परवाह न करना) हट! मैं तुम्हारे जैसे धोखेबाज दोस्त को अँगूठे पर मारता हूँ।
  12. अँचरा या अंचल पसारना (विनती करना, दीनता दिखाना, माँगना)— भगवान् भास्कर के सामने छठ के मौके पर सभी अंचरा पसारते हैं। 
  13. अंटी मारना (चाल चलना) — उसने ऐसी अंटी मारी कि वे चारों खाने चित हो गए।
  14. अंड-खंड कहना या बकना (व्यर्थ बकना, गाली देना) अंड बंड बकना बंद करो, नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा। 
  15. अंडर ग्राउंड होना (फरार होना) घोटाले में फंसने के बाद वह अंडर ग्राउंड हो गया है। 
  16. अंधाधुंध लुटाना (बिना सोचे-विचारे अत्यधिक खर्च करना) वह तो अपना धन अंधाधुंध लुटा रहा है।
  17. अंधा बनना (जान बूझकर fear पर ध्यान न देना) अपने बेटे की गलतियों पर ध्यान दो, अब अंधा बनने से काम नहीं चलेगा।
  18. अंधा बना (बेवकूफ बनाना धोखा देना) तुम मुझे अंधा नहीं बना सकते, मैं सब समझता हूँ।
  19. अंधा होना (विवेकहीन होना) अंधे हो गए हो क्या। छोटे-बड़े का भी खयाल नहीं है, जो मन में आता है बोल देते हो। 
  20. अंधी/उलटी या औधी खोपड़ी का होना (सूर्य, जड़) उसे समझाना ही बेकार है, वह बिलकुल औधी खोपड़ी का है। 
  21. अंधे की लाठी या लकड़ी होना (एकमात्र सहारा होना) उसका इकलौता पुत्र ही उसके लिए अंधे की लाठी है।
  22. अँधेर खाता (अन्याय) मैने मुँहमाँगी कीमत दी है, फिर भी चीज खराब मिली। यह तो अंधेर खाता है।
  23. अंधेर नगरी (अन्याय की जगह) इस अंधेर नगरी में न्याय की आशा करना बेकार है।
  24. अँधेरा छाना (शोक छाना, कोई उपाय न सूझना) श्याम बाबू के यहाँ छापा पड़ा, तो उनकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया।
  25. अकेला दम (अकेला) मैं अकेला दम हूँ, कहीं गुजारा कर लूँगा।
  26. अक्ल का दुश्मन (अत्यंत मूर्ख, बुद्धि-विरुद्ध काम करनेवाला)—तुम अक्स के दुश्मन हो, कोई काम सोच-समझकर नहीं करते।
  27. अक्ल की दुम बनना (बुद्धिमानी छाँटना) उसे आता-जाता तो कुछ नहीं सिर्फ अक्ल की दुम बनता है।
  28. अक्ल या समझ पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना, निहायत बेअक्ल होना, बुद्धि से काम न लेना) बार-बार समझाने पर भी तुम नहीं मानते, लगता है तुम्हारी अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं।
  29. अगले जमाने का आदमी (सज्जन पुरुष, ईमानदार) आज के जमाने में अगले जमाने के आदमी को मूर्ख समझा जाता है। 
  30. अठखेलियाँ सूझना (मजाक करना, दिल्लगी करना) मै संकट में फँसा हूँ और तुम्हें अठखेलियाँ सूझ रही है।
  31. अड़चन डालना (बाधा उपस्थित करना) सरकार को बदनाम करने के लिए उसकी प्रत्येक योजना में विपक्षी दल अड़चन डालते रहते हैं। 
  32. अड़ियल द (हडी, जिद्दी) रमेश को समझाना बहुत कठिन है, क्योंकि वह तो अडियल टट्टू है।
  33. अन्न-जल या दाना-पानी उठना (जीविका न रहना, स्थान परिवर्तन होना) ऐसा लगता है कि तुम्हारा यहाँ से अन्न-जल उठ गया है, सभी से तो तुमने दुश्मनी ले रखी है।
  34. अन्न-जल करना (जलपान आदि करना) यार । बहुत दिनों बाद मिले हो, अन्न-जल तो कर लो।
  35. अन्न लगना (खाकर मोटा होना, स्वस्थ रहना) तुम्हें यहाँ का अन्न लग गया है।
  36. अपना उल्लू सीधा करना (किसी को मूर्ख बनाकर अपना कार्य निकालना, स्वार्थ सिद्ध करना) आज के नेता चुनाव जीतते ही अपना उल्लू सीधा करने लगते हैं।
  37. अपना किया पाना (कर्म का फल भोगना) — ऐसे दुर्जनों की संगति कर पछताते क्यों हो, तुम्हें तो अपना किया पाना ही पड़ेगा। 
  38. अपना घर समझना (निःसंकोच व्यवहार करना) — इसे आप अपना घर समझिए, जो जरूरत हो माँग लीजिए।
  39. अपना सा मुँह लेकर रह जाना या लौट आना (लज्जित होना, निराश होकर लौट आना)—जब वह निर्दोष राजेश को मुकदमे में नहीं फँसा सका, तो अपना सा मुँह लेकर रह गया।
  40. अपनी खिचड़ी अलग पकाना (सबसे पृथक कार्य करना या विचार रखना, सबसे अलग रहना) मोहन तो सदा अपनी खिचड़ी अलग पकाता है, उसे दूसरों से क्या लेना-देना।
  41. अपनी डफली अपना राग (अपने मन की करना) सोहन तो सदा अपनी डफली अपना राग अलापता रहता है।
  42. अपनी ही ओटना (अपनी start कहते जाना) अरे भई। कुछ मेरी भी सुनेंगे या अपनी ही ओटते रहेंगे? 
  43. अपने पाँवों या पैरों पर कुल्हाड़ी मारना (खुद को नुकसान करना, जान बूझकर आफत में पड़ना) दुष्टों से झगड़ा मोल लेकर सुरेश ने अपने पाँवों पर कुल्हाड़ी मार ली है।
  44. अपने पाँव पर खड़े होना (स्वावलंबी होना) — एम. ए. करने के बाद भी अब तक अपने पाँव पर खड़े न हो सके।
  45. आँख आना या उठना (आंख में लाली, पीड़ा और सूजन होना)— तुम्हारी दाई आँख आ गई है, किसी डॉक्टर से दिखलाओ।
  46. आँख उठाकर न देखना (उपेक्षा करना, ध्यान न देना, तिरस्कार करना, लज्जा या संकोच करना) — मैं उनके पास घंटों रहा, पर उन्होंने आँख उठाकर भी नहीं देखा।
  47. आँख उठाना (कुदृष्टि या शत्रु-भाव से देखना)- हमारे रहते तुम्हारी और कोई आँख नहीं उठा सकता।
  48. आँख का काजल चुराना (गहरी चोरी करना/बड़ी सफाई के साथ चोरी करना) अरे! वह तो चोरों का सरदार है, आँख का काजल चुराना कोई उससे सीखें।
  49. आँख का पानी गिरना या ढल जाना (निर्लज्ज हो जाना) उसकी आँखों का पानी ढल गया है, वह चाहे जो कहे।
  50. आँख की किरकिरी होना (खटकनेवाली वस्तु या व्यक्ति) राम आजकल मोहन की आँखों की किरकिरी हो गया है। 
  51. आँख खुलना (सजग होना, ज्ञान होना) आधुनिक शिक्षा से युवाओं की आँखें खुल रही हैं।
  52. आँख गड़ना (आँख किरकिराना/ आँख दुखना, प्राप्ति की उत्कट इच्छा होना) मेरी आँख मारुति कार पर गड़ गई है।
  53. आँख गड़ाना (टकटकी बांधना, प्राप्ति की इच्छा करना) मेरी नई गाड़ी पर क्यों आँख गड़ाए बैठे हो?
  54. आँख या नजर पर/में चढ़ना (किसी चीज के लिए लोभ होना, दुश्मनी मोल लेना) तुम्हारी घड़ी उसकी आँखों पर चढ़ी हुई है, सतर्क रहना। 
  55. आँख मारना (आँखों से इशारा करना) सोहन सभी बातें सच-सच बता रहा था, पर श्याम द्वारा आँख मारते ही वह चुप हो गया।
  56. आँख में गड़ना (बुरा लगना, मन में बसना/पसंद आना) मारुति कार मेरी आँख में गड़ गई है, इसे मैं जरूर खरीदूँगा ।
  57. आँख लगना (झपकी आना, दृष्टि जमना) आँखें लगी ही थीं कि तुमने जगा दिया /हमारी आँखें तो उसी ओर लगी है, पर वे आते दिखाई नहीं देते। 
  58. आँख लगाना (टकटकी बाँधकर देखना, कुदृष्टि) मेरी तरक्की पर तुम आँख मत लगाओ।
  59. आँख से आँख मिलाना (दृष्टि बराबर करना, नजर लड़ाना) वह निगाह उठाता है, किंतु मुझसे आँख से आँख नहीं मिलाता। 
  60. ऑंखें अटकना (प्रेम होना, आकर्षित होना) उस मनोहारी दृश्य पर मेरी आँखें अटक गई।
  61. आँखें खुलना (जागना, सजग होना) तुम्हारी आहट पाते ही मेरी आँखें खुल गई। पश्चिमीय शिक्षा से देशवासियों की आँखें खुल गई। 
  62. आँखें चार होना (सामना होना, प्रेम होना) आँखें चार होते ही वे एक दूसरे पर मरने लगे।
  63. आँखें चुराना (नजर बचाना / कतराना) वह जिस दिन से उधार ले गया है, आँखें चुराता फिरता है।
  64. आँखें डबडबाना या भर आना (आंखों में आंसू आना) उनकी दुःख भरी कहानी सुनकर मेरी आँखे भर आई।
  65. आँखें दिखाना (कोष की दृष्टि से देखना /कोप जताना) बच्चे की छोटी छोटी गलतियों पर इस तरह आँखें मत दिखलाओ। 
  66. आँखें नीली-पीली या लाल-पीली करना (नाराज होना/गुस्सा करना) आप तो नाहक ही अपनी आँखें नीली-पीली कर रहे हैं, मैंने कोई गलती नहीं की है।
  67. आँखें फेरना या फेर लेना (मित्रता तोड़ना/विरुद्ध होना) क्यों भई। तुम मुझे देखते ही आँख फेर लेते हो ?
  68. आँखें बदल जाना (सहानुभूति न रह जाना) चुनाव जीतते ही विधायकजी की आँखें बदल गई।
  69. आँखें बिछाना (तन्मयता से देखना / प्रेमपूर्वक प्रतीक्षा करना) — राधा का पति वर्षो बाद घर आ रहा है, अतः वह सुबह से ही आँखें बिछाए बैठी है। 
  70. आँखें मूँदना या मूँद लेना (आँखें बंद करना, ध्यान न देना, मरना) — उन्हें जो जी में आए करने दो, तुम अपनी आँखें मूँद लो। जब तक उसके पिता जीवित है तभी तक सबकुछ ठीक है, जिस दिन वे आँखें मूँद लेगे सब बिखर जाएगा।
  71. आँखें सेंकना (सौंदर्य-दर्शन का सुख प्राप्त करना) मेले-ठेले में बहुत-से नवयुवक सिर्फ आँखें सेंकने के लिए ही जाते हैं।
  72. आँखों का काँटा बनना या होना (कष्ट या पीड़ा देना, खटकना) उसी के कारण मैं अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रहा हूँ, वह तो मेरी आँखो का काँटा बन गया है।
  73. आँखों का तारा या आँखों की पुतली होना (बहुत प्यारा व्यक्ति)—मेरा बेटा मेरी आँखों का तारा है।
  74. आँखों के आगे अँधेरा छाना (संकट के समय निराश होना) अपनी नौकरी चले जाने के भय से उनकी आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा।
  75. आँखों पर चरबी छाना (घमंडी या लापरवाह होना) – आजकल उनकी आँखों पर चरबी छाई हुई है, भला वे क्यों किसी को पहचानेगे ।
  76. आँखों पर परदा पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना) – जयनंद की आँखों पर ऐसा परदा पड़ा कि उसे अपने-पराए का भी ज्ञान न रहा।
  77. आँखों में खून उतरना (अनंत कोष से आँखे लाल होना) – पाकिस्तानियों के कारनामे देखकर भारतीयों की आँखों में खून उतर आए हैं। 
  78. आँखों में गड़ना (खटकन किसी वस्तु के प्रति लोभ होना)—तुम्हारी बाइक मेरी आँखों में गढ़ गई है, मैं भी ऐसी ही बाइक लेना चाहता हूँ। 
  79. आँखों में धूल झोंकना / डालना या देना (सरासर धोखा देना, भय मै डालना)—तुम अभी-अभी किताब ले गए हो और अब हमारी आँखों में धूल झोंक रहे हो।
  80. आँखों में पानी न होना (निर्लज्ज होना) — बेईमान लोगों की आँखों में पानी नहीं होता।
  81. आँखों में रात काटना (सारी रात जागना, व्याकुल रहना) किसी अनहोनी पटना से सशंकित होकर उन्होंने आँखों में रात काट दी।
  82. आँच न आने देना (बिलकुल कष्ट न होने देना) तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है, मैं तुम पर कभी भी आँच न आने दूंगा। 
  83. आँसू पीकर रह जाना (भीतर-ही-भीतर रोकर रह जाना) आँसू पीकर रह जाना गरीबों की लाचारी है।
  84. आँसू पोंछना (दिलासा देना, ढाढ़स बँधाना) — इस संकट की घड़ी में उसके आँसू पोछनेवाला कोई नहीं है। 
  85. आकाश-कुसुम खिलाना (असंभव कल्पना करना) — मरे हुए व्यक्ति को जिंदा करना आकाश-कुसुम खिलाना है।
  86. आकाश चूमना या छूना (बहुत ऊँचा होना) बड़े शहरों की इमारतें तो आकाश छूती है।
  87. आकाश-पाताल एक करना (भारी परिश्रम करना, धूम मचाना)—जब तक उसने इस कार्य को पूरा नहीं किया, आकाश-पाताल एक किए रहा। वे जरा-सी बात के लिए आकाश-पाताल एक कर देते हैं।
  88. आकाश-पाताल का अंतर होना (बहुत अंतर) राम और श्याम के स्वभाव में आकाश-पाताल का अंतर है। 
  89. आकाश से बातें करना (बहुत ऊँचा होना)—बड़े शहरों की इमारतें तो आकाश से बातें करती है।
  90. आग उगलना (कए वचन सुनाना/जली-कटी सुनाना)—मुझे सांत्वना देने आए हो या आग उगलने ? 
  91. आग-बबूला होना (बहुत गुस्सा करना) आग-बबूला होने से ही इस समस्या का समाधान नहीं होगा।
  92. आग बरसना (बहुत गरमी पड़ना, बड़े कठोर वचन कहना) आज इतनी गरमी है, मानों आग बरस रही हो।
  93. आग बरसाना (रख पर खूब गोलियाँ चलाना) भारतीय सेना दुश्मनों पर तब-तक आग बरसाती रही, जब तक उनके पाँव उखड़ गए। 
  94. आग भड़कना (उत्पात होना, झगड़ा होना) बात-बात में उनके बीच आग भड़क गई।
  95. आग में कूदना या कूद पड़ना (जानबूझकर पति मोल लेना)—इस गुडे से मुँह लगाना आग में कूदने के बराबर है।
  96. आग पर या में घी डालना (किसी के क्रोध को भड़काना) — यह तो पहले से ही क्रोधित है, उसे पुरानी बात की याद दिलाकर तुम आग में भी डालने का काम कर रहे हो।
  97. आग पर या में पानी डालना (झगड़ा शांत करना) —— उनलोगों को आपस में उलझते हुए देखकर मुझे आग पर पानी डालना पड़ा।
  98. आग लगाना (किसी भाव को भड़काना) देखो, उनलोगों के बीच आग मत लगाओ। 
  99. आटे दाल का भाव मालूम होना (व्यावहारिक ज्ञान होना)—शादी होने के बाद ही उसे आटे-दाल का भाव मालूम हुआ।
  100. आठ-आठ आँसू बहाना या रोना (अत्यधिक विलाप करना, खुरी तरह पछताना)—–पढ़ने का जब समय था तो पढ़ा नहीं, अब आठ-आठ आँसू बहाने से क्या होगा।
  101. आड़े हाथों लेना (बुरा-भला कहना, खरी-खरी सुनाना) — कार्यालय में विलंब से पहुँचने पर अधिकारी ने उसे आड़े हाथों लिया।
  102. आना-कानी करना (हिचकिचाना, ना-नुकर करना)– देखो, तुम मेरे सारे पैसे दे दो, आना-कानी करने से काम नहीं चलेगा। 
  103. आपा खोना या आपे या पाजामे से बाहर होना (क्रोध या हर्ष के आवेग से अधीर होना)—बच्चे की साधारण-सी भूल के कारण आपे से बाहर होना ठीक नहीं है।
  104. आपे में नहीं रहना (बेकाबू होना, wwराना, बदहवास होना) मारे क्रोध के वह इस समय आपे में नहीं है। विपत्ति में बुद्धिमान् भी आपे में नहीं रह पाते।
  105. आवाज उठाना या ऊँची करना (किसी या विरोध में कहना)—सरकार के खिलाफ आवाज उठाना एक साधारण-सी बात हो गई है। 
  106. आवाज कसना (व्यय करना, ताने मारना) तुम अपने कार्यों पर ध्यान दो, मेरे कार्य पर आवाज कसने से कुछ नहीं होगा।
  107. आसन डोलना (चित्त क्षुब्ध होना/चित्त चलायमान होना) — मेनका का रूप देखते ही विश्वामित्र का डोल गया था।
  108. आसमान के तारे तोड़ना (कोई असंभव कार्य करना) आजकल सरकारी नौकरी मिलना आसमान के तारे तोड़ने जैसा है।
  109. आसमान टूटना या टूट पड़ना (अचानक आफत आना) पिता की अचानक मृत्यु हो जाने से उसपर आसमान ही टूट पड़ा। 
  110. आसमान पर उड़ना या चढ़ना (घमंड दिखाना, गरूर करना) उसे चपरासी की नौकरी क्या मिली, वह आसमान पर चढ़ गया।
  111. आसमान पर थूकना (बड़े आदमी को निंदित करने के प्रयत्न में स्वयं निंदित होना) गाँधीजी की शिकायत करना आसमान पर थूकने जैसा है। 
  112. आसमान पर दीये जलाना (मिथ्या गर्व करना) आसमान पर दीये जलानेवालों का समाज में आदर नहीं होता।
  113. आसमान सिर पर उठा लेना (ऊधम करना, कोलाहल मचाना)— बच्चो ! शांत हो जाओ, क्यों आसमान सिर पर उठा लिए हो ? 
  114. आसमान से गिरना (अनायास बिना परिश्रम के प्राप्त होना)—तुम तो कुछ कामकाज करते नहीं, रुपए क्या आसमान से गिरेंगे ?
  115. आसमान से बातें करना (आसमान छूना/बहुत ऊँचा होना) मुंबई की अधिकतर इमारतें आसमान से बातें करती हैं।
  116. आस्तीन का साँप होना (कपटी मित्र, विश्वासघाती) तुम उसे अपना मित्र मत समझो, वह तो आस्तीन का साँप है। 
  117. इज्जत उतारना या बिगाड़ना (बेइज्जत करना, अपमानित करना) — एक छोटी-सी बात के लिए उसने उसकी इज्जत उतार ली। 
  118. इज्जत देना (सम्मान करना, आदर करना) नेताजी के कार्यों को देखकर यहाँ की जनता उन्हें बहुत इज्जत देती है ।
  119. इज्जत पर या में बट्टा लगना (इज्जत में दाग लगना, सम्मान कम हो जाना)— गलत कार्य करते पकड़े जाओगे तो इज्जत में बट्टा लगेगा। 
  120. इधर की दुनिया उधर होना (अनहोनी बात का होना) चाहे इधर की दुनिया उधर हो जाए, मैं यह कार्य नहीं करूँगा ।
  121. ईंट का जवाब पत्थर से देना (प्रहार के बदले दोगुना प्रहार करना)—– यदि पड़ोसी देश ने कोई दुस्साहस किया, तो हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। 
  122. ईंट से ईंट बजना (किसी नगर या घर का ढह जाना या ध्वस्त होना/तबाह होना) यहाँ कभी सुंदर नगर था, आज ईंट से ईंट बज रही है।
  123. ईंट से ईंट बजाना (तबाह करना, बरबाद करना) शत्रु सेना ने इस शहर की ईंट से ईंट बजा दी।
  124. ईद या दूज का चाँद होना (बहुत दिनों के बाद मुलाकात होना)—आजकल तुम ईद के चाँद हो गए हो, कहाँ रहते हो ?
  125. ईमान बेचना (अपने कर्तव्य से हट जाना) लाख कोशिशों के बावजूद मुंशीजी ने अपना ईमान नहीं बेचा।
  126. उँगली उठाना (लांछित करना, दोषी बताना) चाहे गलती किसी की भी हो, पर लोग तो तुम्हारी ओर ही उँगली उठा रहे हैं। 
  127. उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना (घोड़ा उग कर अधिक उगने का प्रयास करना)— उनसे सावधान रहो, वे उँगली पकड़कर पहुंचा पकड़ लेते हैं। 
  128. उँगली पर नाचना (किसी के इशारे पर चलना) उसे स्वयं कुछ करने की क्षमता नहीं है, अपने भाई की उँगली पर ही नाचता रहता है।
  129. उगल देना (सच बोलना, गुप्त बात बता देना) – पुलिस ने अपराधियों को इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने सारी बातें उगल दी।
  130. उठ जाना (दुनिया से उठ जाना, मर जाना) अंत में तो एक न एक दिन सभी को उठ जाना है।
  131. उठा न रखना (कोई कमी न छोड़ना) – पाकिस्तान ने भारत को बदनाम करने के लिए कुछ भी उठा न रखा है।
  132. उड़ती चिड़िया पहचानना या उड़ती चिड़ियों के पंख गिनना (बहुत अनुभवी होना) यह थानेदार उड़ती चिड़ियों के पंख गिनना जानता है। 
  133. उन्नीस-बीस का अंतर होना (बहुत ही थोड़ा अंतर होना)—– इन दोनों जुड़वाँ भाइयों में तो उन्नीस-बीस का ही अंतर है।
  134. उलटी गंगा बहना (अनहोनी बात होना) उस शरारती लड़के को मन लगाकर पढ़ते देखकर मुझे लगा कि आज उलटी गंगा बह रही है। 
  135. उलटी गंगा बहाना (रीति-विरुद्ध चलना) मूर्ख को विद्वान् बनाने की कोशिश करना, उलटी गंगा बहाना है।
  136. उलटे उस्तरे या छुरे से मूँड़ना (उल्लू बनाकर काम निकालना, उगना) उस जालसाज ने तो मुझे आज उलटे उस्तरे से ही मूँड़ दिया।
  137. उल्लू का पट्ठा होना (महामूर्ख होना) वह तो पूरा उल्लू का पट्ठा है, कुछ समझता ही नहीं।
  138. उल्लू बनना (बहस आदि में हारकर निरुत्तर होना) – सोहन आज भाषण प्रतियोगिता में उल्लू बन गया।
  139. उल्लू बनाना (बेवकूफ बनाना, ठगना)—देखो! अब तुम मुझे और उल्लू नहीं बना सकते।
  140. उल्लू सीधा करना (किसी को मूर्ख बनाकर अपना कार्य निकालना/स्वार्थ सिद्ध करना) उल्लू सीधा करना कोई तुमसे सीखे।
  141. ऊचा सुनना (कम सुनना) — बुढ़ापे में प्रायः लोग ऊँचा सुनने लगते हैं। 
  142. एक आँख से देखना (समान भाव रखना/एक ही तरह का बर्ताव करना) प्रायः सभी माता-पिता अपनी संतानों को एक आँख से देखते हैं।
  143. एक का तीन बनाना (खूब ना करना) आजकल वे अपने व्यापार में एक का तीन बना रहे हैं।
  144. एक न चलना या नहीं चल पाना (कोई युक्ति सफल न होना) मेरे सामने उसकी एक न चली। 
  145. एक लकड़ी या लाठी से सबको हाँकना (अच्छे-बुरे की पहचान न होना) तुम्हें बड़े-छोटे का भी ध्यान नहीं है, सबको एक ही लकड़ी से हाँकते हो।
  146. एजेंट होना (दलाली करना) आजकल अशोक तो जमीन क्रय-विक्रय का एजेंट हो गया है।
  147. एड़ी-चोटी का जोर लगाना या एड़ी-चोटी का पसीना एक करना (अति परिश्रम करना) परीक्षा में प्रथम स्थान पाने के लिए एड़ी-चोटी का पसीना एक करना होगा।
  148. ऐक्टिंग करना (दिखावा करना) ऐक्टिंग मत करो, सही बात बताओ। 
  149. औंधे मुँह गिरना (बेतरह चूकना या धोखा खाना) वे चले थे मुझे फँसाने, पर स्वयं ही औधे मुंह गिर गए।
  150. कंट्रोल करना (नियंत्रण करना) आप अपने लड़के को कंट्रोल कीजिए, उसकी काफी शिकायतें मिल रही है।
  151. कंधा देना या लगाना (अरथी में कंधा लगाना, सहारा देना) राम लाल की अरथी को सोहन ने कंधा लगाया।
  152. कंधे से कंधा मिलाना (पूर्ण सहयोग देना) किसी कठिन सामूहिक कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर चलने से सफलता आसान हो जाती है।
  153. कच्ची गोटी या गोली खेलना (अनाड़ीपन करना, अनुभवहीन होना)—उसने कोई कच्ची गोटी खेली है जो तुम्हारी बातों में आ जाएगा।
  154. कटे या जले पर नमक छिड़कना (दुःखी को और अधिक कष्ट देना, बहुत सताना) मैं पहले से ही दुःखी है, क्यों कटे पर नमक छिड़क रहे हो ? 
  155. कपास ओटना (दुनियादारी में लगे रहना) आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास ।
  156. कफन सिर पर या से बाँधना (मौत से न घबराना) वीर सैनिक अपने सिर पर कफन बाँधकर युद्ध में जाते हैं।
  157. कब्र खोदना (हानि पहुंचाने का उपाय करना) जो दूसरों के लिए कम खोदता है, उसका जनाजा पहले ही उठ जाता है।
  158. कब्र में पाँव या पैर लटकाना (मृत्यु के करीब होना) आपके पाँव कम में लड़के हुए है, अब तो चेत जाइए।
  159. कमर कसना या बाँधना (किसी काम को करने के लिए तैयार होना/ उद्यत होना / संकल्प करना) सफलता चाहते हो, तो पढ़ाई के लिए कमर कस लो।
  160. कमर टूटना (उत्साह का न रहना, निराश होना) उसकी नौकरी क्या छूटी, उसकी तो कमर ही टूट गई। 
  161. कमर सीधी करना (चकावट दूर करना, आराम करना) बहुत काम कर लिया, अब जरा कमर सीधी कर लेता है।
  162. कलई खुलना (वास्तविक रूप का प्रकट होना, असली भेद खुलना) घोटाले की कलई खुलते ही सभी आश्चर्यचकित रह गए।
  163. कलई खोलना (छिपी हुई बुराइयों प्रकट कर देना) सी. बी. आई. ने घोटाले की सारी कलई खोलकर सरकार के सामने रख दी। 
  164. कल पड़ना (राहत महसूस होना) आज धूप निकली है तो ठंढ से कल पड़ी है। 
  165. कलम तोड़ना (लिखने की हद कर देना) बिहारी ने क्या खूब दोहे लिखे हैं, कलम ही तोड़ डाली।
  166. कलेजा काँपना (जी दहलना/डर लगना)—आतंकवादी को देखकर मेरा कलेजा काँपने लगा।
  167. कलेजा काढ़कर रखना या काढ़ना (अत्यंत दुःख पहुंचाना किसी की अत्यंत प्रिय वस्तु ले लेना/दिल निकालना) – किसी का कलेजा काढना निष्ठुर कार्य है।
  168. कलेजा काढ़ लेना (हृदय में वेदना पहुँचाना/किसी का सर्वस्व हरण कर लेना, मोहित करना) उसने मेरी पांडुलिपि क्या चुराई, लगता है कलेजा काढ़ लिया। 
  169. कलेजा चीरकर दिखाना (पूरा विश्वास दिलाना)—मैं बिलकुल सत्य कह रहा हूँ, कहो तो मैं कलेजा चीर कर दिखा सकता हूँ। 
  170. कलेजा टूक-टूक होना (शोक से हृदय विदीर्ण होना) श्रीमती गांधी की हत्या का समाचार सुनकर मेरा कलेजा ट्रक-टूक हो गया था।
  171. कलेजा ठंडा होना (तृप्ति होना, संतोष होना/अभिलाषा पूरी होना) सीत की मौत पर उसका कलेजा ठंडा हो गया।
  172. कलेजा निकालकर धर/रख देना या रखना (सर्वस्व देना, की बात कह देना) यदि हम कलेजा निकालकर रख दें तो भी तुम्हें विश्वास न होगा।
  173. कलेजा पसीजना (करुणा उत्पन्न होना, द्रवित होना) उस दीनहीन व्यक्ति को देखकर मोहन का कलेजा पसीज गया। 
  174. कलेजा फटना (दिल पर बेहद चोट पहुँचना, ईर्ष्या होना) उसकी मृत्यु का समाचार सुनकर उसके बेटे का कलेजा फट गया।
  175. कलेजा मुँह को या मुँह तक आना (जी घबड़ाना, व्याकुल होना) उसकी मृत्यु का समाचार पाते ही मेरा कलेजा मुँह को आ गया। 
  176. कलेजा होना (साहस या हिम्मत होना)—– यदि कलेजा हो तो सामने आओ। 
  177. कलेजे पर पत्थर रखना (दिल कठोर करना, अत्यधिक बरदाश्त करने की क्षमता होना) – अपने हिस्से की संपत्ति न मिलने पर उसने अपने कलेजे पर पत्थर रख लिया। 
  178. कलेजे या छाती पर साँप फिरना/लोटना (बहुत व्याकुल होना, भारी सदमा पहुँचना) – मेरी सफलता देखकर उसकी छाती पर साँप लोटने लगा। 
  179. कलेजे पर हाथ धरना या रखना (अपनी आत्मा से पूछना, विश्वास के साथ कहना) – अपने कलेजे पर हाथ रखकर कहो कि तुमने रुपए नहीं लिए।
  180. कसम खाना या लेना (शपथ लेना, प्रतिज्ञा करना) – मैं आज कसम खाता हूँ कि कभी झूठ नहीं बोलूँगा। 
  181. कसम खिलाना (बाध्य करना)—देखो! इस काम के लिए मुझे कसम मत खिलाओ।
  182. कहीं का न रहना (सब तरफ से ठुकराया जाना) – तुम्हारी खराब बोली तुम्हे कहीं का न रहने देगी।
  183. काँटा निकलना (बाधा या कष्ट दूर होना) – उस बदमाश से पीछा क्या छूटा. मानो काँटा निकल गया।
  184. कागज काला करना (व्यर्थ कुछ लिखना) – प्रश्नोत्तर सही-सही लिखो, सिर्फ कागज काला करने से अच्छे अंक नहीं मिलेंगे। 
  185. कागज या कागजी घोड़े दौड़ाना (खूब लिखा-पढ़ी करना/खूब चिट्ठी-पत्री भेजना/परस्पर खूब पत्र-व्यवहार करना) — पिता की मृत्यु के बाद उनके कार्यालय में सुनील कागजी घोड़े दौड़ाता रहा, पर नौकरी न मिली। 
  186. काठ मार जाना (स्तब्ध हो जाना)—– ट्रेन दुर्घटना की खबर पाकर उसे तो काठ मार गया ।
  187. कान उमेठना/ऐंठना या पकड़ना (दंड देने हेतु किसी का कान मरोड़ देना.. कोई काम न करने की कड़ी प्रतिज्ञा करना)—लो भाई, कान ऐंठता हूँ, अब ऐसा कभी नहीं करूँगा।
  188. कान का कच्चा होना (जो दूसरों के बहकावे में आ जाए) श्याम बहुत कान का कच्चा है, शीघ्र ही किसी के बहकावे में आ जाता है।
  189. कान काटना (मात देना) तर्क में वह बड़ों के भी कान काटता है। 
  190. ‘अपने’ कान खड़े करना (चौकन्ना होना/सचेत होना)—तुम बहुत कुछ खो चुके, अब तो कान खड़े करो।
  191. ‘दूसरे के’ कान खड़े करना (सचेत करना/ होशियार कर देना/ चेताना) मैने उसके कान खड़े कर दिए. अब उसकी मरजी। 
  192. कान खड़े होना (सचेत होना, सजग होना) — उनलोगों की आपस की बातें सुनकर राहुल के कान खड़े हो गए। 
  193. कान खोलना (सावधान करना) — काले धन के विरुद्ध घोषणा करके सरकार ने काला बाजारियों के कान खोल दिए हैं।
  194. कान देना (ध्यान देना) बड़ों की बातों पर कान देना चाहिए।
  195. कान पकड़ना (कान पकड़कर दंडित करना, अपनी भूल स्वीकार करना) – पाठ याद नहीं करने पर शिक्षक ने छात्रों को कान पकड़कर दंडित किया 1/ मैं अपने कान पकड़ता हूँ कि ऐसा काम नहीं करूँगा।
  196. कान पकना (व्यर्थ का बकवास सुनते रहने से चिढ़ होना) – आपके झूठ सुनते-सुनते तो मेरे कान पक गए हैं। 
  197. कान पर जूँ रेंगना (स्थिति का ज्ञान होना, होश होना) – चीनी आक्रमण के बाद ही नेहरूजी के कान पर जूँ रेंगी।
  198. कान पर जूँ तक न रेंगना (कुछ भी परवाह न होना, कुछ भी ध्यान न होना) – शरारती बच्चों के कान पर जल्दी जूँ नहीं रेंगती।
  199. कान फूँकना (बहकाना, चेला बनाना/दीक्षा देना) – यदि शरारती बच्चों के संपर्क में रहोगे, तो वे कान फूँककर अपने जैसा बना देंगे।
  200. कान फुंकवाना (गुरुमंत्र लेना/दीक्षा लेना) – अनपढ़ लोग अनपढ़ गुरु से कान फुंकवाकर गर्व महसूस करते हैं।
  201. कान भर देना या भरना (गुपचुप निंदा करना/बुगली करना) – लोगो ने पहले से ही उनके कान भर दिए थे, इसलिए मेरा कहना सुनना व्यर्थ हुआ। 
  202. कान में तेल या रूई डालकर बैठना (बेखबर हो जाना/ध्यान न देना) – मेरी बात ध्यान से सुनो, कान में तेल डालने से काम नहीं चलेगा।
  203. कान लगाना (ध्यान देना) – मेरी बातों पर कान लगाओ, तुम्हें लाभ होगा। 
  204. कानों-कान खबर होना (बात फैलना) – उसकी गिरफ्तारी की कानोकान खबर हो गई।
  205. काम चलाना (आवश्यकता पूरी करना) – अभी तो मैं तुम्हें इतने ही पैसे दे सकता है, इसी से काम चलाना पड़ेगा। 
  206. काम आखिर या तमाम करना (मार डालना/जान ले लेना, काम पूरा करना) हमें अतिशीघ्र सारे काम तमाम कर देना चाहिए।
  207. काम आखिर या तमाम होना (प्राण निकल जाना, काम समाप्त हो जाना) – महीने भर का काम दो दिन में ही तमाम हो गया।
  208. कायल होना (दूसरे को स्वीकार करना) – हम तो उनकी विद्वता के कायल है।
  209. किताब का कीड़ा होना (हरपते रहना)- किताब का कीड़ा बनने से स्वास्थ्य खराब होता है, थोड़ा खेलना भी चाहिए। 
  210. किरकिरा होना (आनंद में बाधा होना) – आज घूमने जाना था, किंतु वर्षा से सारा मजा किरकिरा हो गया।
  211. कीचड़ उछालना (जिंदा करना/निरादर करना) – चुनाव में राजनीतिक दल एक-दूसरे के विरुद्ध कीचड़ उछालते रहते हैं।
  212. कुआँ खोदना (दूसरे का अहित करने का प्रयत्न करना, जीका के लिए परिक्षण करना) /  जो दूसरों के लिए कुआँ खोदता है, स्वयं गड्ढे में गिरता है।
  213. कुएँ में भांग पड़ना (बुरा बात का व्यापक प्रभाव होना) – यहाँ तो कुएँ में भाँग पड़ी है, कोई सुनता ही नहीं।
  214. कुत्ते की मौत मरना (दुर्गाीत होना, कष्टकर मौत होना) – अगर तुमने अपनी बुरी आदते नहीं छोड़ी, तो कुत्ते की मौत मरोगे।
  215. कूट-कूटकर भरना (पूरा होना, अधिक होना) – हमारी सेना में साहस कूट कूटकर भरा हुआ है।
  216. कोदो देकर पढ़ना या सीखना (अधूरी या बेढंगी शिक्षा पाना) – तुम गणित कुछ नहीं जानते, लगता है कोदो देकर पढ़ाई की थी।
  217. कोल्हू का बैल होना (बहुत कठिन परिश्रम करनेवाला/दिन-रात मेहनत करनेवाला) – कोल्हू का बैल बनने पर भी इस महँगाई में घर का खर्च पूरा नहीं हो पाता।
  218. कोसों दूर भागना (हुत दूर/बहुत अलग रहना)—देखिए, राजनीति हमारे वरा की चीज नहीं है, हम उससे कोसों दूर भागते हैं।
  219. कौड़ी का तीन होना (बेकदर होना/नगण्य होना)—जग्गू-जैसे आवारा के साथ रहकर तुम भी कौड़ी के तीन हो गए हो। 
  220. कौड़ी-कौड़ी जोड़ना (मोड़ा-थोड़ा करके seat करना) – उन्होंने कौड़ी कौड़ी जोड़कर इतनी संपत्ति बनाई है।
  221. क्यू में लगा रहना (बहुत देर तक प्रतीक्षा करना) – वह नौकरी पाने के लिए कब से क्यू में लगा हुआ है।
  222. खटाई में पड़ना (झमेले में verse होना) – बिजली की कमी के कारण कारखाने का काम खटाई में पड़ गया है।
  223. खबर लेना (दंड देना, ध्यान देना) – तुम्हारी काफी शिकायतें मिली हैं, आज मैं तुम्हारी खबर लूँगा।
  224. खयाली पुलाव पकाना (असंभव बातें सोचना/वे सिर-पैर की बातें करना) – तुम कुछ काम भी करो, सिर्फ खयाली पुलाव मत पकाओ।
  225. खराद पर चढ़ना (जाँव में आना) – अपनी मनमानी करते-करते बड़े बाबू आखिर खराद पर चढ़ ही गए। 
  226. खरी-खरी सुनाना (सच्ची बात कह देना) – जब मैने उसे सबके सामने खरी खरी सुनाई, तो उसकी बोलती बंद हो गई।
  227. खरी-खोटी सुनाना (कटुवचन कहना/भला-बुरा कहना) – खरी-खोटी सुनाने से क्या लाभ समझौता कर लो।
  228. खाक छानना (बहुत ढूँढना, व्यर्थ प्रयत्न करना) – कहाँ कहाँ की खाक नहीं छानी, पर वह न मिला। नौकरी के लिए वह खाक छानता रहा।
  229. खाक में मिलना (बरबाद होना) – कुछ गलत लोगों के कारण ही उस संस्था की गरिमा खाक में मिल गई। 
  230. खाली हाथ जाना (बिना उद्देश्य की सिद्धि हुए) – पुलिस गई थी उस कुख्यात अपराधी को पकड़ने, परंतु खाली हाथ लौट गई।
  231. खिल उठना (अत्यंत प्रसन्न होना) – परीक्षा फल पाते ही वह खिल उठा।
  232. खिलखिला पड़ना (खुश होना, खुलकर हँस पड़ना) – खिलौने को देखते ही बिटिया रानी खिलखिला पड़ी।
  233. खिल्ली उड़ाना (हँसी उड़ाना/ उपहास करना) – किसी गरीब की खिल्ली उड़ाना अच्छी बात नहीं है।
  234. खुशामदी टर्ट होना (चापलूस होना)— तुम तो खुशामदी टट्टू हो, अपना काम दूसरों से करवा ही लेते हो। 
  235. घंटे के बल उछलना या कूदना (किसी अन्य के भरोसे जोश दिखाना)— खेट के बल उछलने या कूदने से काम नहीं चलेगा, अपना सामर्थ्य दिखाओ।
  236. जून उबलना या खौलना (क्रोच से शरीर लाल होना/गुस्सा बढ़ना) – अपने दुश्मनी को देखकर सोहन का खून उबलने लगता है।
  237. खून के घूंट पीना (क्रोध सह जाना) – जब भी मेरा दुश्मन मेरे सामने आता है, मैं खून के घूँट पीकर रह जाता हूँ। 
  238. जन खुश्क होना या सूखना (अत्यंत भयभीत होना)—जंगल में शेर को देखते ही उसका खून सूख गया। 
  239. खून-पसीना एक करना (कठिन परिश्रम करना)—यह घर मैने खून-पसीना एक करके बनाया है।
  240. खेत आना या रहना (युद्ध में मारा जाना/वीरगति प्राप्त करना) – कारगिल युद्ध में हजारों सैनिक खेत रहे।
  241. खेल खेलाना (परेशान करना) – अब और ज्यादा खेल मत खेलाओ, अपनी मतलब की बात कहो।
  242. खेल बिगाड़ना (काम खराब कर देना) –/तुमने ऐन वक्त पर मेरे पैसे न लौटाकर मेरा खेल ही बिगाड़ दिया। 
  243. खोपड़ी गंजी करना (बहुत मारना पीटना) – तुम उलटा-पुलटा काम करना छोड़ दो, नहीं तो मैं तेरी खोपड़ी गंजी कर दूँगा।
  244. गंगा-लाभ होना (देहावसान होना) – गत सप्ताह उसके पिताजी का गंगा लाभ हो गया।
  245. गज भर की छाती होना या हाथ भर का कलेजा होना (गर्व होना) – बेटे की सफलता पर पिता की छाती गज भर की हो गई।
  246. गड़े मुरदे उखाड़ना (पुरानी बात उभारना) – अब गड़े मुरदे उखाड़ने से कोई लाभ नहीं, आगे कुछ करना होगा।
  247. गरदन उठाना (प्रतिवाद करना/विरोध करना) – अमीरों के शोषण के विरुद्ध अब गरीबों ने गरदन उठाना शुरू कर दिया है।
  248. गरदन कटाना (मर जाना) – मैं तो तुम्हारे लिए गरदन कटाने को भी तैयार हूँ ।
  249. गरदन काटना (मार डालना, हानि पहुँचाना) – राम सिंह ने उस गरीब की जमीन पर कब्जा करके उसकी तो गरदन ही काट डाली।
  250. गरदन पर सवार होना (पीछा न छोड़ना)—– यदि तुम्हें अपने पैसे वापस लेने है, तो तुम उसकी गरदन पर सवार रहो।
  251. गला छूटना (पीछा छूटना/छुटकारा मिलना) – उसे सौ रुपए दिए, तब जाकर गला छूटा।
  252. गले का हार होना (अत्यंत प्रिय/चिर सहचर होना) – वह दोस्त ही नहीं, मेरे गले का हार है।
  253. गले पर छुरी फेरना (किसी को भारी हानि पहुँचाना) – उस बेरोजगार युवक को नौकरी दिलाने के नाम पर श्याम बाबू ने काफी पैसे ठग कर उसके गले पर छुरी फेर दी ।
  254. गले मढ़ना (किसी की इच्छा के विरुद्ध उसे देना/ दूसरे के न चाहने पर भी उसे कोई काम सौपना) – इसे मेरे गले मत मढ़ो।
  255. गले लगाना (प्यार से मिलना या भेटना/आत्मीय बनाना) – गले लगाने पर कभी-कभी दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं।
  256. गहरी या गाढ़ी छनना (अत्यंत घनिष्ठता होना) – कृष्ण और सुदामा में गहरी छनती है।
  257. गाँठ का पूरा होना (धनी होना) – वे गाँठ के पूरे हैं, तभी तो अपनी लड़की की शादी में इतना ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
  258. गाँठ में बाँधना (अच्छी तरह याद रखना) – आज इस बात को अच्छी तरह गाँठ में बाँध लो कि अब तुम झूठ नहीं बोलोगे। 
  259. गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत अधिक का समावेश करना)—बिहारी के दोहे गागर में सागर के समान है।
  260. गाजर-मूली या सांग-पात समझना (तुच्छ या निर्बल समझना) – अपने दुश्मनों को गाजर-मूली समझना बहुत मूर्खता है।
  261. गाल या मुँह फुलाकर बैठ जाना या फुलाना (रूठकर न बोलना, अभिमान प्रकट करना) – गाल फुलाना कोई उससे सीखे।
  262. गाल बजाना (बड़ी-बड़ी बातें करना) – उसने अपनी सफलता की बात बताकर गाल बजाना शुरू कर दिया। 
  263. गिन-गिनकर पैर रखना (सावधानी से चलना, अत्यंत सावधान रहना) — वह किसी भी कार्य में सदैव गिन-गिनकर पैर रखना जानता है।
  264. गिरगिट की तरह रंग बदलना (बहुत जल्दी सम्मति या सिद्धान्त बदल देना/कभी कुछ, कभी कुछ कहना और करना) – उससे सावधान रहो, वह गिरगिट की तरह रंग बदलता है।
  265. गुड़-गोवर करना (बिगाड़ना, खराब करना) – मैंने इतनी मेहनत की, परंतु तुमने सारा गुड़-गोबर कर दिया।
  266. गुदड़ी का लाल (साधनहीन गुणी व्यक्ति) – लालबहादुर शास्त्री गुदड़ी के लाल थे।
  267. गुबार निकालना (कटु और अप्रिय बातें कहकर मन का कोच दूर करना) – राम ने श्याम को खूब खरी-खोटी सुनाकर अपने मन का गुबार निकाल लिया।
  268. गुल करना (बुझाना) – सुबह होने को है, अब बत्ती गुल कर दो। 
  269. गुल खिलना (अनोखे काम होना, भेद खुलना) – उनके कार्य से तो ऐसे गुल खिले है कि विश्वास नहीं होता।
  270. गुस्सा पीना (क्रोध को प्रकट न करना)—उस समय मैं तो अपना गुस्सा पी गया, नहीं तो अनर्थ हो जाता।
  271. गूलर का फूल होना (दुर्लभ होना) – आजकल ईमानदार व्यक्ति गूलर के फूल हो गए हैं।
  272. गोटी लाल होना (लाभ होना) – अब तो तुम्हारी गोटी लाल है। 
  273. गोद भरना (संतान होना) – वर्षो बाद उसकी गोद भरी है।
  274. गोवर- गणेश होना (निरा मूर्ख होना) – उसकी समझ में कुछ भी नही आएगा, वह तो पूरा गोबर गणेश है।
  275. गोलमाल करना (गड़बड़ करना) – वे अपने कार्यालय में बहुत दिनों से गोलमाल कर रहे थे, आज पकड़े गए। 
  276. गोली मारना (तुच्छ या अनावश्यक समझना) अरे । गोली मारो उसकी बातों को, वह बहुत बेकार आदमी है।
  277. ग्रीन सिगनल देना (आदेश देना) — इस कार्य को आरंभ करने के लिए मंत्री जी ने मीन सिगनल दे दिया है। 
  278. घड़ों पानी पड़ना (बहुत लज्जित होना) — श्याम के पिताजी ने उसे जुआ खेलते देखा, तो उस पर घड़ों पानी पड़ गया।
  279. घर का चिराग गुल होना या घर का दीपक बुझना (घर का सर्वनाश होना, इकलौती संतान को खो देना)— उनके घर का चिराग ही गुल हो गया। 
  280. घर फोड़ना (परिवार में झगड़ा लगाना) उसकी तो आदत ही है घर फोड़ने की।
  281. घर बसाना (विवाह करना, गृहस्थी जमाना) – उसने हाल ही में अपना घर बसाया है।
  282. घाट-घाट या सात घाट का पानी पीना (अनेक स्थानों के भ्रमण का अनुभवी होना)—यह अनाड़ी नहीं है, घाट घाट का पानी पी चुका है। 
  283. घात लगाना (युक्ति भिड़ाना, मौके की तलाश में रहना) वह अपनी दुश्मनी का बदला लेने के लिए बहुत दिनों से घात लगाए हुए है।
  284. घाव हरा होना (अतीत के दुःख को याद करना) पिछली बातें सुनाकर क्यों मेरा बाद हरा कर रहे हो ?
  285. घास काटना / खोदना या छीलना (तुच्छ काम करना, व्यर्थ काम करना)—इस तरह घास काटने से कुछ होनेवाला नहीं है।
  286. घी के दीये जलाना (आनंद- मंगल मनाना) – भारत के स्वतंत्र होने पर देशवासियों ने भी के दीये जलाए थे।
  287. घुटने टेक देना या टेकना (पराजित होना, पराजित होने से लज्जित होना,घुटने के बल बैठना)—सरकार की गलत नीतियों के कारण चीनियों के सम्मुख भारतीय सेना को घुटने टेकने पड़े थे। 
  288. घोड़ा या घोड़े बेचकर सोना (खूब निश्चित होकर सोना/ गहरी नींद में सोना) घोड़ा बेचकर सोओगे, तो चोर सामान चुरा ही लेगा न।
  289. चंगुल में फँसना (किसी के वश में हो जाना) – पहले उसे मेरे चंगुल में फँसने तो दो, फिर देखो कैसा मजा चखाता हूँ।
  290. खाने की गप (झूठी कप) – तुम हमेशा चड़खाने की गप करते हो। 
  291. चंपत हो जाना (भाग जाना) — वह मेरा मोबाइल लेकर चंपत हो गया। 
  292. चकमा देना (धोखा देना, उगना) – उससे सावधान रहना, वह तुम्हें कभी भी चकमा दे सकता है।
  293. चक्कर में आना (धोखा खाना) – आज मैं उसके चक्कर में आ गया। 
  294. चक्कर में डालना (उलझन में डालना) – उसने झूठा वादा करके मुझे चक्कर में डाल दिया है।
  295. चक्की पीसना – (बहुत परिश्रम करना) – अभी मौज उड़ा लो, जब चक्की पीनी पड़ेगी तो पता चलेगा। 
  296. चट कर जाना (हजम कर लेना, दूसरे की वस्तु न लौटाना) – मेरे रुपार वह चट कर गया।
  297. चलता-पुरजा होना (काफी चालाक होना) – आज के जमाने में चलता पुरजा होना जरूरी है।
  298. चल निकलना (प्रत करना, प्रसिद्ध या लोकप्रिय होना) – इन दिनों जीन्स का फैशन खूब चल निकला है। 
  299. चल बसना (मर जाना)— स्वामी विवेकानंद कम उम्र में ही चल बसे थे।
  300. चसका (बुरी लत लगना)– आजकल उसे शराब पीने का चसका लग गया है। 
  301. चाँद पर थूकना (महान् पुरुष पर लांछन लगाकर स्वयं अपमानित होना) – गांधीजी पर आरोप लगाना चाँद पर थूकने जैसा है।
  302. चाँदी काटना (खूब धन कमाना, आनंद से जीवन बिताना) — गल्ले के व्यापार में वे खूब चाँदी काट रहे हैं। 
  303. चाँदी के जूते मारना (रिश्वत देना/न के बल पर काम कराना) – आजकल तो जिसे भी चाँदी के जूते मारोगे, वही तुम्हारा काम करेगा।
  304. चादर के बाहर पैर पसारना या फैलाना (अपनी हद से बाहर जाना)– किसी भी कार्य योजना में चादर के बाहर पैर नहीं पसारना चाहिए।

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