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महात्मा गाँधी पर निबंध | Mahatma Gandhi Essay in Hindi

महात्मा गांधी एक ऐसे महापुरुष जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा एवम् लोककल्याण में समर्पित कर दिया गांधीजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे और इनकी ख्याति सिर्फ भारत में ही नही बल्कि पूरे विश्व भर में फैली हुई थी दोस्तों आज हम आपको भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर निबंध जानेंगे। 

महात्मा गांधी सत्य एवम् अहिंसा के परम पुजारी थे उन्होंने भारत की आजादी के लिए भी सत्य और अहिंसा के मार्ग को ही चूना और वे किसी भी प्रकार के अहिंसात्मक कार्यों के बिल्कुल विरोधी थे उनका मानना था की सत्य और अहिंसा के पथ पर चलकर ही भारत को आजाद कराया जा सकता है और उनकी इसी सोच के कारण उन्हें लोगों का भरपूर साथ मिला बहुत बड़े मात्रा में लोगों ने गांधी जी का साथ दिया। 

Mahatma Gandhi Essay in Hindi

अंतः गांधी जी ने सत्य और अहिंसा को ही अपना अस्त्र-शास्त्र बनाकर वर्षों से अंग्रेजों के हाथों गुलाम हुए भारत को स्वतंत्रता दिलायी गांधीजी मूल रूप में एक अध्यात्मिक संत थे और उनका उद्देश्य धार्मिक जीवन व्यतीत करना था वे मानवता की सेवा को ही अपना वास्तविक धर्म समझते थे गांधी जी के जीवन काल की परिस्थितियां कुछ ऐसी थी जहां लोग एक दूसरे से घृणा करते थे, काले-गोरे में भेदभाव करते थे। 

पूंजीपतियों द्वारा गरीब एवं असहाय लोगों का शोषण चरम सीमा पर था तथा भारत में अंग्रेजों द्वारा भारतीय लोगों पर निर्मम अत्याचार किए जा रहे थे। क्योंकि गांधीजी मानवता को ही अपना धर्म मानते थे, इसलिए इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें राजनीतिक के क्षेत्र में प्रवेश करना पड़ा।

गांधी जी स्वयं कहते थे की “मैं उस समय तक धार्मिक जीवन व्यतीत नहीं कर सकता था जब तक की स्वयं को संपूर्ण मानवता के साथ एकीकृत ना कर लेता और यह मैं उस समय तक नहीं कर सकता था जब तक कि राजनीति में भाग नहीं लेता” गांधी जी को सर्वप्रथम 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने ‘महात्मा’ के नाम से संबोधित किया था।

जैसे की आप जानते ही होंगे की महात्मा गाँधी को भारत देश लोग जिन्हें हम बापू के नाम से भी जानते है और  देश में इन्हें भगवन की तरह पूजा जाता है क्योकि इनका देश की आजादी में ज्यादा योगदान है बहुत सारे लोग महात्मा गाँधी के बारे में जानकारी इन्टरनेट पर ढूढ़ते रहते है अगर आप भी देश राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के परिचय जानना चाहते है तो आज आपको इस पोस्ट में महात्मा गाँधी पर निबंध बताने वाले है।

Table of Contents

महात्मा गाँधी पर निबंध – Mahatma Gandhi Short Essay in Hindi

पूरा नाममोहनदास करमचंद गांधी
पिता का नामकरमचंद गांधी
माता का नामपुतलीबाई
जन्म तिथि2 अक्टूबर, 1869
जन्म स्थानगुजरात के पोरबंदर क्षेत्र में
राष्ट्रीयताभारतीय
धर्महिन्दू
जातिगुजराती
शिक्षाबैरिस्टर
पत्नि का पूरा नामकस्तूरबाई माखंजी कपाड़िया [कस्तूरबा गांधी]
संतान बेटा बेटी का नाम4 पुत्र, हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
मृत्यु का तिथि 30 जनवरी 1948
हत्यारे का नामनाथूराम गोडसे

महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद्र गाँधी था इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर नामक ग्राम में हुआ था इसके पिता का नाम करमचंद्र गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई था इन्होने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को अस्त्र बनाकर दक्षिण अफ्रीका में रहनेवाले अप्रवासी भारतीयो का कल्याण किया।

फिर बाद में उसी उधार पर भारत को भी अंग्रेजो की दासता से मुक्त कराया “बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो” के सिध्दांत पर चलनेवाला, सत्य, अहिंसा का यह पुजारी 30 जनवरी 1948 को संसार से विदा हो गया हमें इसके आदर्शो पर चलना चाहिए।

महात्मा गाँधी पर निबंध 250 शब्दों में

महात्मा गांधी हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानी थे उनका जन्म 2 ओकटुबर 1869 में  गुजरात के पोरबंदर गांव में हुआ था गांधी जी के पिता का नाम करमचंद्र गांधी था और उनके माता का नाम पुतलीबाई था गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद्र गांधी हम उन्हें बापू और राष्ट्रपिता के नाम से जानते है।

गांधी जी ने अपनी प्रारंभ शिक्षा पोरबन्दर में और माध्यमिक शिक्षा राजकोट में पूरी की उनहोने उनहोने इंग्लैण्ड जाकर अपनी वकालत की परीक्षा पास की उस समय अंग्रेजो का शासन था महात्मा गांधी जी ने देश की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई  उनहोने अंग्रेजों के खिलाप और देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन असहयोग आंदोलन नागरिक अवज्ञा आंदोलन दाढ़ी मार्च भारत छोडो आंदोलन जैसे आंदोलन काले थे।

आखिर में महात्मा गांधीजी के नेतृत्व और कई कोशिश के कारण  देश को आजादी मिली देश के आजादी के लिए गांधी जी ने सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाया था महात्मा गांधी जी के पूर्व भी सत्य और अहिंसा के बारे में लोग जनते थे परंतु गांधी जी नई जिस प्रकार सत्याग्रह शांति औरहिंसा के रास्ते पर चलते हुए।

अंग्रेजो को भारत छोडने पर मजबूर कर दिया था उसका कोई दूसरा उदाहरण विशव के इतिहास में देखने को नही मिलता महात्मा गकन्धी जी का जीवन सदगीवाला था वे स्वदेसी अस्तुओ के प्रयोग पर बल देते देते थे और वह सदैव सफेद कपङे पहनते थे।

उन्होंने लोगो को मनावता का संदेश दिया दुर्भाग्यवश ऐसे महान व्यकितत्व के धनी महात्मा गांधी जी का देहांत 30 जनवरी 1948 को शाम को होआ था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जीवन अनुकरणीय है आज भी है उनके आदर्स विचार को अपनाकर समाज मे महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते है ।  

महात्मा गाँधी पर निबंध 500 शब्दों में

महात्मा गांधी का असली नाम मोहनदास करमचंद्र गांधी था उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात मे हुआ था उनका जन्म  ओछे परिवार में हुआ था उनके पिताजी का नाम करमचंद्र गांधी था वे पोरबंदर इस्टेट में दीवाने थे महात्मा गांधी का प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विधालयो में हुआ था वे एक साधारण विद्यार्थी थे।

इंट्रेस परीक्षा पास करने के बाद आछे शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड काले गए इंग्लैंड में उन्होंने विधि ―व्यवसाय के योग्यता हाशिल की इंग्लैंड में पड़ते वक़्त उन्होने अपनी चरित्र के प्रति बहुत सोचने लगे थे भारत लौटकर बम्बई (मुम्बई) हाईकोट में उन्होंने वकालत शुरू की थी।

एक मामला के संदर्भ में दक्षिण अफ्रीका के नेटल गए वहां उन्हें मोविकील के केस  की पैरवी करनी थी वह उनहोने भारतीयों की बुरी अवस्था देखी दक्षिण अफ्रीका के यूरोपियन निवशियो द्वारा उनका बहुत अपमान किया जाता था वे नेटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की थी।

उनहोने सत्यग्रह नामक एक नाई अस्त्र का प्रयोग किया उन्हें जेल की सजा भी भुगतनी पढ़ी लेकिन उनके इक्षा और शक्ति ले सत किए गए उनके प्रयास को विजई प्राप्त हुई दक्षिण अफ्रीका में किये गये सफल आंदोलन से पूरे विश्व में उनकी पहचान बनी।

भारत आकर बिहार में निलहों के खिलाफ उन्होने अपनी गतिविधियों को जारी रखा उन्होंने अपना आंदोलन मोतिहारी के विरुद्ध आंदोलन शुरू किया था भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उनहोने नेतृत्व किया देश की स्वतंत्र के लिए उणाहो ने अनेक संघर्स किए उनके कुशल नेतृत्व में राष्ट्र ने अपने लक्षय को प्राप्त किया।

सन् 1891 ईस्वी में लंदन (इंग्लैंड) से वकालत की पढ़ाई पूरी करके गांधी जी भारत लौटे और यहां वकालत करनी प्रारंभ कर दी काठियावाड़ मुंबई में थोड़े दिनों तक वकालत करने के बाद एक धनाढ्य गुजराती मुसलमान की ओर से एक मुकदमे की पैरवी करने सन् 1893 ई. में दक्षिण अफ्रीका चले गए। 

उस समय दक्षिण अफ्रीका में काले गोरे के भेद और अपने देशवासियों की दयनीय दशा को देखकर उनको तीव्र अघात पहुंचा और यही वह समय था जब उनका सार्वजनिक जीवन प्रारंभ हुआ उस समय दक्षिण अफ्रीका में काले-गोरे में भेदभाव अपनी चरम सीमा पर थी। स्वयं गांधीजी भी इस रंगभेद का शिकार हुए थे। 

एक बार सफर करने के दौरान उनके पास प्रथम श्रेणी कोच की टिकट होते हुए भी उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया। क्योंकि उस समय प्रथम श्रेणी में केवल गोरे ही सफर कर सकते थे सन् 1906 ई. से उन्होंने दक्षिण अफ्रीका सरकार के ‘एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट’ (Asiatic registration act) के विरोध सफलतापूर्वक सत्याग्रह किया। 

दक्षिण अफ्रीका में इस प्रकार की सफलता प्राप्त करने के बाद महात्मा गांधी जी ने सन् 1914 में भारतीय राजनीति में प्रवेश किया इस प्रकार गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में 1893 से 1914 तक रहे दक्षिण अफ्रीका यात्रा ने गांधीजी के जीवन को बिल्कुल नया मोड़ मिला और इस यात्रा से उनका राजनीतिक जीवन का शुरुआत हुआ।

महात्मा गांधी एक महान राजनीतियज्ञ और संत थे सत्य और अहिंसा उनके अस्त्र थे गीता की शिक्षा और उसमें दिखाए गए मार्ग उनके जीवन के आदर्श थे उणाहो ने भारत को आजाद कराया लोग उन्हे राष्ट्रपिता कहने लगे थे 30 जनवरी 1948 के शाम को नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई।

वे हमारे विच भौतिक रूप से मवजुड़ नही है लेकिन सच्चे भारती के दिलो में आज भी वो जिंदा है आज उनका जन्मदिन 2 ओक्टुबर को पूरा भरत मनाता है सबने स्वीकार किया है की केवल गांधी का मार्ग ही दुनिया को बचा सकता है।

महात्मा गाँधी पर निबंध 1500 शब्दों में

परिचाय

महात्मा गांधी का परिचय देना यानी सूर्य को दिया दिखाना है वे हमारे देश के इन महापुरोसो मे से एक थे महात्मा गांधी, एक ऐसे महापुरुष जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा एवम् लोककल्याण में समर्पित कर दिया गांधीजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे और इनकी ख्याति सिर्फ भारत में ही नही बल्कि पूरे विश्व भर में फैली हुई थी।

महात्मा गांधी सत्य एवम् अहिंसा के परम पुजारी थे जिनसे राष्ट्रीय जीवन का नया इतिहास तैयार हुआ है भारत की स्वतंत्रा उनकी है अथक सेवाओ का शुभहफल है हैम उन्हे कैसे भूल सकते है।

वे हमारे रोम-रोम में बसे है भारत के मिट्टी में उनकी आवाज आ रही है ,सारा आकाश उनकी अमर आवाज गुज रही है वे राम , कृष्ण बुध, शंकर और तुलसी -जैसे दिव्य पुरषो की तरह घर-घर मे बेस हुआ है।

जन्म और शिक्षा –

 महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर , 1969ई० को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था उनके पिता जी का नाम कंरमचंद्र गांधी था वे राजकोट रियासत के दीवाने थे उनकी माता ने उनका लालन-पालन बड़े ही अचे ढंक से किया था महात्मा गांधी का असली नाम करमचंद्र गांधी था उनकी धार्मिक माता का बड़ा गहरा प्रभाव था। वे आगे चल कर गांधीजी के नाम से परषिद हुए। 

उनकी शिक्षा गांव के एक विद्यालय में सुरु हुई। सन 1887 में उनहोने इंट्रेस की परीक्षा पास की थी वे पहले पढ़ने लिखने में बहुत तेज नही थे उनहों खुद कहा था लजालू लड़का हु मेरी किसी से भी मित्रता नही थी स्कूल में अपने काम से काम रखते थे घंटी बजते ही स्कूल पहुच जाते थे और बढ़ होते ही घर चल देते थे।

उन्हें किसी अन्य लड़की से बात करना अच्छा नही लगता था।क्योकि उन्हे डर लगता था कि उनसे कोई दिल्ल लगी न कर ले बीड़ी पीना ,पैसा चुराना , मांस खाना इत्यादि वह बुरी आदतों से दूर रहते थे वह सन, 1891 ई० में बैरीस्तरी पास कर के इंग्लैंड से भारत बम्बई में वे बैरिस्टर हुए , लेकिन उनकी बैरिस्टरी नही चली।

दक्षिण अफ्रीका में –

एक बार मुकदमे के काम से दक्षिण अफ्रीका गए वहां उन्हो ने बड़ी बड़ी मुसीबतो का सामना करना पड़ा उन्होने देखा कि वहां  भारतीयों के साथ अच्छा व्यवहार नही हो रहा है गांधीजी को बड़ी ठेस लगी उन्होंने वहां सत्याग्रह शुरू किया और उन्हो ने सफलता भी मिली।

दक्षिण अफ्रीका में सफलतापूर्वक सत्याग्रह करने के बाद महात्मा गांधी सन 1914 में भारतीय राजनीति में प्रवेश किया प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1919) के दौरान गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार को पूर्ण सहयोग किया और यह शर्त रखा की इसके बाद ब्रिटिश सरकार भारत को आजाद कर देंगे।

किंतु हुआ इसके विपरीत अंग्रेजों ने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके बाद गांधी जी ने अंग्रेजों का खुलकर विरोध किया और जगह जगह आंदोलन एवं सभाए करने लगे तथा पूरे भारतवासियों से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही। 

देश की सेवाएं –

गांधी जी सन1914 में भारत लौट उन्हो ने देश की गरीबी और गुलामी देखी, अंग्रेजों के अत्याचार देखे और उन्हो ने मनमाना सासन देखा उनकी आँखें खुली और उन्होंने देश सेवा करने की विचार की ददेश को अंग्रेजों से आजाद करने की प्रतिज्ञा की ओर सब जुट गए। 

इस लड़ाई में गांधी जी सन 1917 से वे अंग्रेजो के अत्याचारो खुल कर विरोध करने लगे थे। चंपारण में उणाहो ने अंग्रेजो के विरुद्ध पहला सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा। 

सन 1942 में महान क्रांति हुई ‘करो या मरो’ के नारों से पूरा देश जाग पढ़ा गांधी जी के साथ बहुत से नेता के जेलो में बंद कर दिए गए लेकिन जनता रुकी नही झुकी नही अंत मे अंग्रेजो को लाचार होकर 15 अगस्त 1947 ई० में भारत को आजाद करना पड़ा लेकिन जाते-जाते वे देश को दो टुकड़ो ― भारत और पाकिस्तान―में बाट गए इससे गांधीजी  बड़े दुख हुए।

गाँधी जी की मृत्यु –

जब गांधी जी नई दिल्ली के ‘बिरला भवन’ के बगीचे में टहल रहे थे देश को आजाद करने वाले राष्ट्रपिता बापू को देश के ही एक अभागे नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 की शाम को पिस्तौल तीन गोलियां चलाकर मार दिया आज बापू की कहानी युग – युग मे कहानी बनकर रह गई है।

वे मार कर भी आज हमारे बीच अमर है,  कहा जाता है की जब गांधी जी को गोली लगी तो उनके मुख से निकलने वाला अंतिम शब्द ‘हे राम’ था गांधी जी की हत्यारा करने वाला नाथूराम गोडसे हिंदू राष्ट्रवादी थे और वह हिंदू महासभा से संबंध रखते थे।

गोडसे ने गांधी जी को पाकिस्तान को करोड़ों रुपए भुगतान करने के मुद्दे को लेकर भारत को कमजोर बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे (जो की महात्मा गांधी की हत्या करने में गोडसे का साथ दिया था।) को फांसी दे दी गई।

गांधी जी का विवाह और संतान –

गांधी जी का विवाह बहुत ही कम उम्र में कर दिया गया जब उनका विवाह हुआ तो उनका उम्र करीब 13 साल ही था उनका विवाह मई 1883 में कस्तूरबाई मकनजी के साथ हुआ विवाह के समय कस्तूरबाई जी का उम्र 14 साल थी जो कि गांधी जी से उम्र में बड़ी थी कस्तूरबा गांधी को लोग प्यार से ‘बा’ कहकर बुलाते थे। 

गांधी जी का विवाह उनके माता-पिता द्वारा तय किया गया एक व्यवस्थित बाल विवाह था जो कि उस समय प्रचलित था उस समय यह रीति थी कि बाल विवाह के बाद दुल्हन को अपने माता-पिता के घर अपने पति से दूर रहना पड़ता था सन् 1885 में गांधी जी के घर उनकी पहली संतान का जन्म हुआ परंतु वह ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह सकी। 

वह समय गांधी जी के लिए बिल्कुल ही सही नहीं रहा क्योंकि उसी वर्ष गांधी जी के पिता करमचंद्र गांधी का भी निधन हो गया आगे चलकर गांधीजी और कस्तूरबा के चार संतान हुए और यह चारों पुत्र ही थे जिनका नाम हरीलाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी और देवदास गांधी है।

गांधी जी की कृतियां –

गांधी जी ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन प्रमुख रूप से दो पुस्तकों हिंदू स्वराज्य तथा अपनी आत्मकथा में किया है जिनका नाम बिल्कुल ठीक रूप से सत्य के साथ मेरे प्रयोग रखा गया है उनकी अन्य रचनाएं हैं – ‘शांति और युद्ध में अहिंसा’, नैतिक धर्म, सत्याग्रह, सत्य ही ईश्वर है, सर्वोदय, सांप्रदायिक एकता और अस्पृश्यता निवारण आदि। 

इसके अतिरिक्त गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में इंडियन ओपिनियन नामक साप्ताहिक पत्रिका का भारत में यंग इंडिया, हरिजन, नवजीवन, हरिजन सेवक, हरिजन बंधु आदि पत्रों का संपादन करते हुए अपने विचारों का प्रतिपादन किया सन् 1969 से गांधी शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा गांधीजी के सभी लेखों और भाषणों के प्रमाणित संग्रह कई खंडों में प्रकाशित किए गए हैं।

गांधी जी के मुख्य आंदोलन

महात्मा गाँधी अपने जीवन काल में कई सारे आन्दोलन किये, जिसमे भारत छोड़ो आंदोलन, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन या नमक सत्याग्रह आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि सामिल है आइये इन सभी आंदोलनों के बारे में विस्तार से जानते है।

भारत छोड़ो आंदोलन

सन् 1942 के आते-आते भारत के लोगों के मन में आजादी को लेकर आक्रोश पैदा हो गई थी चाहे बच्चे हो जवान हो या बुड्ढे हो सभी के मन में आजादी की चिंगारी फूट चुकी थी भारत के कोने कोने से आजादी को लेकर आवाज उठने लगी थी भारतीयों द्वारा जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे आजादी की आवाज उठने लगी।

सन् 1942 में गांधी जी ने अपने जीवन के अंतिम अहिंसक संघर्ष ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का संदेश दिया साथ ही करो या मरो का नारा भी दिया यह ऐसा समय था जब बड़ी मात्रा में लोगों को गिरफ्तार किया गया फिर भी आजादी के बुलंद अवाजे कम नहीं हुई और लगातार आजादी की मांग होती रही थी 

एक बार फिर गांधी जी एवं उनके कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को 9 अगस्त 1942 को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें 2 साल तक बंदी बनाकर रखा गया। 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा गांधी का निधन हो गया उस समय गांधी जी जेल में थे बाद में उनकी भी तबीयत खराब होने लगी जिसके कारण अंग्रेजों ने उपचार के लिए 6 मई 1944 को जेल से रिहा कर दिया।

तब तक ब्रिटिश सरकार समझ चुकी थी कि अब भारत को ज्यादा दिन तक गुलाम बनाकर नहीं रखा जा सकता है परिणामस्वरूप 15 अगस्त, सन् 1947 को अंग्रेजों द्वारा भारत को स्वतंत्र घोषित करना पड़ा भारत की स्वतंत्रता बहुत सीमा तक गांधीजी के प्रयत्नों का परिणाम कही जा सकती है।

सन् 1918 में ही खेड़ा (गुजरात) में भी कुछ ऐसे ही स्थिति थी वहां का भी किसान सताया जा रहा था वहां बाढ़ से आई विपत्ति ने किसानों को तोड़ कर रख दिया था वे समय पर टैक्स भरने में असक्षम थे। और ब्रिटिश सरकार ने उनके ऊपर कोई दया-मोह नहीं दिखाया ब्रिटिश सरकार द्वारा किसानों को जबरन टैक्स देने के लिए बाध्य किया गया। 

तब किसानों ने गांधीजी का सहारा लिया और वहां गांधी जी के नेतृत्व में ‘कर ना दो आंदोलन’ चलाया गया जिसमें किसानों को टैक्स में छूट दिलाने की बात कही गई और इसमें भी गांधी जी को संपूर्ण सफलता मिली साथ ही अहमदाबाद के मजदूर आंदोलन में उन्होंने अपूर्व सफलता प्राप्त हुई।

खिलाफत आंदोलन

खिलाफत आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चलाया गया एक आंदोलन था जो मुस्लिमों के कालीफ के खिलाफ चलाया गया था। इसकी शुरुआत अली-बंधुओं (शौकत अली, मोहम्मद अली) के द्वारा किया गया था महात्मा गांधी ने 24 नवंबर 1919 को दिल्ली में हुए अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी के पहला सम्मेलन का अध्यक्षता किया। 

महात्मा गांधी के इस आंदोलन से जुड़ने का मुख्य कारण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में मुस्लिमों का सहयोग बढ़ाना था। वे चाहते थे की भारत के हिंदू और मुसलमान एक साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ खड़े थे यह आंदोलन सन 1919 से 1924 तक चला था। 

उसके बाद इस आंदोलन को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया महात्मा गांधी इसके बाद भी संपूर्ण जीवन हिंदू मुस्लिम एकता के लिए लड़ते रहें किंतु हिंदू और मुस्लिमों में लगातार दूरियां बढ़ती गई।

असहयोग आंदोलन

सन् 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा रॉलेक्ट एक्ट के रूप में एक दमनकारी कानून पास किए जाने और अप्रैल सन् 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के कारण महात्मा गांधी को ब्रिटिश सरकार के नेतृत्व में विश्वास नहीं रहा। अंग्रेजों के दिन पर दिन बढ़ते अत्याचारों को देखते हुए 1 अगस्त 1920 को गांधी जी ने असहयोग आंदोलन का संचालन स्वराज की मांग को लेकर किया। 

इस आंदोलन में गांधीजी के साथ पूरे देश भर के लोगों से मिला।देश के कोने कोने से विद्यार्थियों द्वारा सरकारी स्कूल और कॉलेजों में जाना बंद कर दिया गया। वकीलों द्वारा अदालत जाना मना कर दिया गया। गांधी जी ने लोगों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार तथा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। गांधी जी ने यह संदेश चरखा चलाकर पूरे देशवासियों को दिया। 

इस आंदोलन में श्रमिक वर्गो का भी पूरा साथ मिला। श्रमिकों मजदूरों ने करखानों में काम करने से मना कर दिया और वह हड़ताल पर चले गए। इस आंदोलन में ब्रिटिश सरकार की नीव हिला कर रख दी। यह आंदोलन बिल्कुल ही अहिंसात्मक ढंग से चल रहा था जिसकी वजह से इसमें लोगों का जुड़ाव बहुत ही तेजी से हुआ।

लेकिन आंदोलन के प्रसार के साथ-ही-साथ आंदोलन कहीं-कहीं हिंसक रूप भी धारण करने लगा। 4 फरवरी 1922 गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा में पूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे एक समूह पर ब्रिटिश सैनिकों द्वारा गोली चला दिया गया इससे कुछ लोगों की मौत हो गई इसके बाद गुस्साई भीड़ ने पुलिस स्टेशन पर आक्रमण कर उसमें आग लगा दी। 

इस घटना ने गांधीजी के मन को बहुत आघात पहुंचाया। और अंततः गांधीजी ने दुखी होकर यह आंदोलन स्थगित कर दिया 4 मार्च 1922 को गांधी जी को गिरफ्तार कर उन्हें राजद्रोह के अपराध में 7 वर्ष की सजा दी गई जेल में गांधीजी का स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण 5 फरवरी 1924 को जेल से मुक्त कर दिया गया।

असहयोग आंदोलन स्थगित हो जाने के साथ ही हिंदू-मुस्लिम दंगे भी फिर प्रारंभ हो गए ।गांधीजी को इन दंगों से बहुत दुख पहुंचा और सन् 1924 में जेल से छूटने पर उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए एक 21 दिन का अनशन किया 1924 में ही गांधी जी को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन या नमक सत्याग्रह आंदोलन

सन् 1930 में गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन का संचालन किया। इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को ना मानना था। 12 मार्च 1930 को गांधीजी अपने कुछ स्वयं सेवकों के के साथ दांडी डांडी नामक स्थान के लिए निकले। 

दांडी तक पहुंचते-पहुंचते उनके साथ हजारों लोगों का समुह जुड़ गया। और वहां पहुंच कर उन्होंने 5 अप्रैल सन् 1930 को नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए नमक कानून को तोड़ा यह यात्रा दांडी यात्रा के नाम से प्रसिद्ध है।

सन् 1931 में गांधी-इरविन समझौता के आधार पर सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर उन्होंने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया था गांधी जी का कार्य रचनात्मक राजनीति की दिशा में एक प्रयास था, लेकिन लीग के प्रतिनिधियों और ब्रिटिश नौकरशाही के अपवित्र गठबंधन के कारण गांधीजी को कोई सफलता नहीं मिली।

FAQ

Q : महात्मा गांधी का पूरा नाम क्या था?

Ans : मोहनदास करमचंद्र गांधी

Q : गाँधीजी के राष्ट्रीय गुरु कौन थे?

Ans : गोपाल कृष्ण गोखले

Q : गाँधीजी के पिता कौन थे?

Ans : करमचंद गाँधी 

Q : गाँधीजी की माता कौन थी?

Ans : पुतलीबाई गांधी

Q : महात्मा गांधी के बच्चे कौन है?

Ans : महात्मा गाँधी के 4 बच्चे थे जिनका नाम हरिलाल गाँधी, मणिलाल गाँधी, देवदास गाँधी, रामदास गाँधी था

Q : महात्मा गाँधी के पत्नी का नाम क्या था?

Ans : कस्तूरबा गांधी

Q : महात्मा गाँधी को किसने मारा?

Ans : 30 जनवरी, 1948 की शाम को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भौतिक शरीर की हत्या नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर कर दी गई थी

Q : महात्मा गांधी की बेटी का नाम क्या था ?

Ans : राजकुमारी अमृत

Q : महात्मा गांधी ने देश के लिए क्या किया ?

Ans : देश को आजादी दिलाने में विशेष योगदान रहा था

Q : महात्मा गांधी का जन्म कहां हुआ था ?

Ans : गुजरात के पोरबंदर में हुआ था.

Q : महात्मा गांधी ने कौन सी पुस्तक लिखी थी ?

Ans : हिन्द स्वराज, सन 1909 में

Q : महात्मा गांधी कौन सी जात के थे ?

Ans : गुजराती

उम्मीद करता हूँ की महात्मा गाँधी पर निबंध (Mahatma Gandhi Essay in Hindi) आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा अगर आपको इसके बारे में समझने में कोई दिक्कत हो या कोई सवाल है तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है हम आपके प्रश्न का उत्तर जरूर देंगे।

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